हार के बाद फरार होने के बजाय समर्पण अलग किरदार
पार्टी बदली लेकिन जनश्रद्धा वही, मुफ्त करवाया विंध्यवासिनी के दर्शन

हार के बाद फरार होने के बजाय समर्पण अलग किरदार
पार्टी बदली लेकिन जनश्रद्धा वही, मुफ्त करवाया विंध्यवासिनी के दर्शन

प्रतापगढ़ 17अगस्त : चुनाव में जनता का सबसे बड़ा सेवक बनना और चुनाव मैदान में खुद को औरों से बेहतर दिखाना यह तो प्रायः देखा ही गया है मगर दुःख तब होता है ज़ब नेता हार के बाद फरार हो जाते हैं। वैसे तो नेताओं के लिए अवसरवादी होना कोई नई बात नहीं है लेकिन उनकी चुनाव के दौरान की निष्ठा और भाव का आभाव उन्हें जनमानस से बहुत दूर कर देता है। फिलहाल इन सब से इतर जनपद के सदर विधान सभा के प्रत्याशी रहे आशुतोष त्रिपाठी का चुनाव के बाद भी फील्ड से जुडा रहना उन्हें सबसे अलग करता है। चुनाव हारने के बाद फरार होने के बजाय जनता के प्रति समर्पण को लेकर विंध्यवासिनी के मुफ्त दर्शन करवाना उन्हें जनश्रद्धा से जोड़ती है। यह बहुत कम ही देखने को मिलता है ज़ब हार के बाद कोई नेता चुनावी निष्ठा को बरकरार रखता हो और उनके बीच निरंतर बना रहता है। प्रायः यह देखा जाता है कि चुनाव आते ही नेताओं की धमाकेदार एंट्री तो फ़िल्म अभिनेता कि तरह होती है लेकिन चुनाव के बाद ऐसा फरार होते हैं कि जैसे किसी नई दुनियां में चले गए हों। आम चर्चा में लोग कहते हैं चुनाव के दौरान दिखने वाले नेता अवसरवादी होते हैं जो वोट के लिए बड़े बड़े वायदे करते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई मुँह नहीं दिखाता। ऐसे में आशुतोष त्रिपाठी कि होर्डिंग पुरे क्षेत्र में सबसे पहले लगती और वो हर आयोजन में नजर आते हैं। उनके अलग किरदार को पुरे 5 वर्ष सभी नें देखा है।


