महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व सांसद मसूरिया दीन की जयंती मनाई गई।
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेसजनों ने तीनों महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जी ने किया।

महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व सांसद मसूरिया दीन की जयंती मनाई गई।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
प्रतापगढ़, 2 अक्टूबर।
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेसजनों ने तीनों महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जी ने किया।
उन्होंने कहा कि आज के दिन एक ऐसे सूर्य का उदय हुआ था भारत की धरा पर जिसने 200 वर्ष की गुलामी के अंधेरे को सत्य और अहिंसा के तेज से छांट दिया। गांधी जी के अहिंसक आंदोलनों की गूंज ब्रिटेन के कोने-कोने को कंपायमान करती रही। एक ऐसी शख्सियत जिसका लोहा पूरी दुनिया ने माना, उनके दिखाए मार्ग पर आज दुनिया के आधे से ज्यादा देश चलते हैं, उन्होंने असहमति को भी सम्मान दिया। जिस भारत को 1940 के दशक में गांधी ने एक सूत्र में पिरो दिया था। जिस शख्स को भारत के राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘महात्मा’ की उपाधि दी और स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस ने ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया उनकी जयंती पर उन्हें मेरा मनभर नमन।”
जिला उपाध्यक्ष राम शिरोमणि वर्मा जी ने कहा कि “गांधी जी ने असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए अपने देशवासियों से आह्वान किया था, इस समय लाल बहादुर शास्त्री केवल सोलह वर्ष के थे। उन्होंने महात्मा गांधी के इस आह्वान पर अपनी पढ़ाई छोड़ देने का निर्णय कर लिया था। 1930 में महात्मा गांधी ने नमक कानून को तोड़ते हुए दांडी यात्रा की, इस प्रतीकात्मक सन्देश ने पूरे देश में एक तरह की क्रांति ला दी। शास्त्री जी ने कई विद्रोही अभियानों का नेतृत्व किया एवं कुल सात वर्षों तक ब्रिटिश जेलों में रहे। आजादी के बाद 1946 में उन्हें उत्तर प्रदेश का संसदीय सचिव और फिर गृह मंत्री बनाया गया। 1951 में वे नई दिल्ली आ गए एवं रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा गृह मंत्री रहे। एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने इस्तीफा देकर संवैधानिक मर्यादा की मिसाल कायम की। ‘मेहनत प्रार्थना करने के समान है’ – ऐसे विचार रखने वाले ‘जय जवान-जय किसान’ के उद्घोषक, सत्य, सादगी एवं ईमानदारी के प्रतीक भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।”
नगर अध्यक्ष मोहम्मद इश्तियाक जी ने कहा –
“2 अक्टूबर 1911 – 21 जुलाई 1978, आज ही के दिन प्रयागराज के जोंधवल, तेलियरगंज में माता पार्वती देवी और पिता बिंदेश्वरी प्रसाद पासी के घर एक ऐसे लाल का जन्म हुआ था, जिसने गुलाम भारत में दलित समाज की आवाज को देश की सबसे बड़ी पंचायत तक पहुंचाया। महात्मा गांधी और पं. मोतीलाल नेहरू जी से प्रेरित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े, देश के लिए 1932 से 1944 के बीच लगभग 9 साल जेल में बिताए। अंग्रेजों द्वारा हमारी पासी जाति पर लगाए गए काले कानून ‘जरायम पेशा कानून’ को हटवाने में उनकी भूमिका को इतिहास कभी नहीं भूल सकता। आप सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं बल्कि भारत के भाग्य विधाता भी थे, संविधान सभा के सदस्य, अनंतिम संसद के सदस्य और आजाद भारत की पहली चार लोकसभाओं तक लगातार सांसद रहे।
ऑल इंडिया पासी महासभा के अध्यक्ष के रूप में मसुरिया दीन ने गांव-गांव चौपाल लगाकर शिक्षा की अलख जगाया। ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी, संविधान निर्माता, समाज सुधारक बाबू मसूरिया दीन पासी जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।”
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कोषाध्यक्ष वेदान्त तिवारी, काशी नारायण मिश्रा, मकरंद शुक्ला, रवि भूषण सिन्हा, विजय प्रताप त्रिपाठी, मासूम हैदर, सुरेश कुमार मिश्रा, सुरेश कुमार सरोज, मोहम्मद वसीम, कृष्ण कुमार शुक्ला, फतेह बहादुर सिंह, तनवीर खान, राधेश्याम दुबे, रवि प्रताप सिंह, मकसूद अहमद, मो.रफीक सहित दर्जनों पदाधिकारी उपस्थित रहे।


