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उत्तरप्रदेशलखनऊ

संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाए जाएं: रघुराज प्रताप सिंह

जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने की मांग की है।

संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाए जाएं: रघुराज प्रताप सिंह

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज नेटवर्क
लखनऊ, 19 अगस्त।

जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने की मांग की है।

इस बयान के बाद राजा भइया को देश भर के लोगों का समर्थन मिल रहा है।राजा भइया ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि इन शब्दों को हटाने के बाद ही संविधान मूल रूप में आ पाएगा।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे संविधान की प्रस्तावना का जो मूल रूप है वही स्वरूप वापस होना चाहिए।

राजा भइया ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिन विद्वानों ने संविधान को लिखा, उसकी रचना की और उसे बनाया, उन्होंने इन शब्दों को उसमें सम्मिलित नहीं किया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के समय में इंदिरा गांधी ने प्रस्तावना में संशोधन कर दिया।

उन्होंने सवाल किया कि क्या इंदिरा गांधी बाबा साहब या सरदार पटेल से बड़ी विद्वान हो गईं थी? क्या इसे तानाशाही नहीं कहा जाएगा?

राजा भइया ने कहा कि जिन देशों में संविधान है, वहां हर संविधान की एक प्रस्तावना होती है। यह प्रस्तावना देश के संविधान की मूल भावना होती है।

राजा भइया के इस बयान का देश भर के लोगों ने समर्थन किया है। सोशल मीडिया पर राजा भइया के समर्थन में कई पोस्ट और ट्वीट किए गए हैं।

राजा भइया के बयान पर समाजवादी पार्टी के विरोध करने पर आम जनमानस ने सपाइयों को आईना दिखाते हुए कहा कि राजा भइया की आवाज़ समय की मांग है।

DrShakti KumarPandey

डा० शक्ति कुमार पाण्डेय अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और यूएनआई के पत्रकार रहे हैं। आजकल 'ग्लोबल भारत' मासिक पत्रिका और न्यूज पोर्टल के प्रधान सम्पादक हैं।

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